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कथा विमर्श और आज के जरूरी सवाल

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कथा विमर्श और आज के जरूरी सवाल                                                                                                   रामनाथ शिवेंद्र  दुनिया बदली है और उसके साथ हमारे चिन्तन और विमर्श के आयाम भी बदले हैं। इन बदलावों ने मानव सभ्यता को दिया क्या है, यही सोचने की बात है। ज्ञानमीमांसा के सारे क्षेत्र जो समाजनीति, अर्थनीति, शिक्षानीति, राजनीति और विज्ञान जैसे वौद्धिक क्षेत्रों के उत्पाद हैं, हम देख रहे हैं कि ये सारे के सारे हमारे सिर को छूते हुए निकलते जा रहे हैं। हम पहले भी सत्य की खोज में लगे थे यही सत्य की खोज ने ज्ञानमीमांसा का विषय और चिंतन के रूप में विस्तार किया है। दुख है कि हम आज तक सत्य और परम सत्य की खोज नहीं कर पाये हैं। जगत मिथ्या वाला सत्य तो कब का अपनी आध्यात्मिक व्याख्याओं की खोह में दुबक चुका है। चरम भौतिकता के दौ...